यह पाठ्यक्रम हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के विकास, प्रवृत्तियों और प्रमुख साहित्यिक आंदोलनों का समग्र परिचय प्रदान करता है। पाठ्यक्रम की शुरुआत 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन के साहित्यिक प्रभावों से होती है और भारतेंदु युग, द्विवेदी युग, हिंदी नवजागरण, छायावाद तथा छायावादोत्तर काव्य के विभिन्न आयामों का अध्ययन कराया जाता है।
पाठ्यक्रम में हिंदी गद्य की प्रमुख विधाओं—निबंध, नाटक, कहानी, उपन्यास, आत्मकथा, जीवनी तथा यात्रावृत्तांत—के विकास, स्वरूप और साहित्यिक महत्व पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अतिरिक्त, समकालीन हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण विमर्शों जैसे स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श और किन्नर विमर्श को शामिल किया गया है, जिससे शिक्षार्थी साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों को व्यापक दृष्टि से समझ सकें।
विशेषज्ञ व्याख्यानों, अध्ययन सामग्री, स्व-मूल्यांकन तथा असाइनमेंट आधारित गतिविधियों के माध्यम से यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों की साहित्यिक समझ, आलोचनात्मक दृष्टि और विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास करने में सहायक होगा। यह पाठ्यक्रम स्नातक स्तर के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा हिंदी भाषा और साहित्य में रुचि रखने वाले सभी शिक्षार्थियों के लिए उपयोगी है।