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ABOUT THE COURSE:भारतीय काव्यशास्त्र‘ को विभिन्न समयों में ‘समालोचना शास्त्र‘, ‘समीक्षाशास्त्र‘, ‘साहित्यालोचन’, ‘काव्यालोचन’, ‘सौन्दर्यशास्त्र‘ आदि भी कहा जाता रहा है। अपने मूल स्वरूप में यह ‘संस्कृत काव्यशास्त्र’ ही है। जिस तरह से विभिन्न भारतीय भाषाओं में रचे जा रहे साहित्य को संस्कृत की क्लासिकल रचनाओं का आधार मिला है, उसी तरह से विभिन्न भारतीय भाषाओं में रचे जा रहे साहित्य का परिशंसन और समीक्षण भी संस्कृत काव्यशास्त्र के आधार पर ही होता रहा है। इस दृष्टि से भाषा और साहित्य के स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम अनिवार्य है। काव्य के स्वरूप, काव्य-लक्षण, काव्य-हेतु, काव्य-प्रयोजन आदि विषयों की चर्चा करते हुए इस पाठ्यक्रम में रस, ध्वनि, अलंकार, रीति, वक्रोक्ति, तथा औचित्य सम्प्रदाय का भी अध्ययन किया जाएगा। हिन्दी पढ़ रहे विद्यार्थियों को विशेषत: ध्यान में रखकर यह चेष्टा की गई है कि भारतीय काव्यशास्त्र के विविध पक्षों का यहां स्पष्ट, तथ्यात्मक, सन्तुलित और उदाहरण सहित विवेचन किया जाए। कहना चाहिए कि हिन्दी के विद्यार्थियों के लिए यह 'सुगम काव्यशास्त्र' ही है।
INTENDED AUDIENCE: U.G. and P.G. Students of HINDI
INTENDED AUDIENCE: U.G. and P.G. Students of HINDI